मुरादनगर में गम और गुस्से का है माहौल: मनोज पंडित

यूपी की भ्रष्ट सरकार को सबक सिखाने का मन बना चुके हैं पीड़ित परिवार
सपा के प्रतिनिधिमंडल ने मुरादनगर शमशान घाट का दौरा कर पीड़ितों की भावनाएं जानीं
सूर्या बुलेटिन (गाजियाबाद)। मुरादनगर के शमशान घाट में आज भी लोग अपने प्रियजनों की चीखें उस मनहूस गैलरी के मलवे में महसूस कर रहे हैं। कई दिन बीत जाने के बाद भी लोग उस हादसे को भूल नहीं पा रहे हैं। दुख भरी आंखें अपनों के बिछुड़ने का गम बता रहीं हैं वहीं नगरपालिका के जिम्मेदार अधिकारियों, नेताओं व ठेकेदार के प्रति आक्रोश भी उगल रहीं हैं। दुख और आक्रोश के मंजर को गुरुवार को वहां के दौरे पा गये समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने महसूस किया और कहा कि यहां की जनता को भ्रष्टाचार की जो कीमत चुकानी पड़ी है वो आने वाले दिनों में वह इसका चुन-चुन का बदला सरकार से लेगी।
यह कहना है समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल में शामिल वरिष्ठ नेता मनोज पंडित का। उन्होंने इस हादसे में जिन लोगों ने अपनों को खोया है और प्रदेश सरकार द्वारा उचित राहत नहीं दी गई है, उनमें सरकार के प्रति जबर्दस्त गुस्सा है। मनोज पंडित ने कहा कि भ्रष्टाचार मुक्त शासन का वादा करके सत्ता में आयी भाजपा की योगी आदित्यनाथ सरकार की पोल खुल गई है। मुरादनगर शमशान घाट के हादसे के बाद नागरिकों की आंखें खुल गयीं हैं और उसे स्पष्ट नजर आ गया है कि प्रदेश में भ्रष्टाचार का राज चल रहा है। मनोज पंडित ने कहा कि यूपी में तो भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया है, यहां के अधिकारी, सत्ता दल के नेता और ठेकेदार ने तो मानवता को ही बेच खाया है, जिस शमशान घाट के निर्माण में समाजसेवी व राजनीतिज्ञ अपने जेब से दान कर पुण्य कमाते हैं उसी शमशान घाट के निर्माण में मोटा कमीशन खा कर लोगों को मौत के मुंह में धकेल दिया गया है। उन्होंने कहा कि मुरादनगर के पीड़ितों का कहना है कि निर्माण में दबे लोगों का मंजर जीवन में कभी नहीं भूलेगा और वो अपनी ओर से सरकार को कभी माफ नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार की गलती की सजा उन्हें बेवजह भुगतनी पड़ी, बताइये हम लोगों का क्या अपराध था कि हमारे लोग ही अकाल मौत के मुंंह में चले गये। हम लोगा अनाथ हो गये। अब हम लोगों को कौन सहारा देगा। मनोज पंडित ने बताया कि कई लोगों ने तो यहां तक कहा कि हम लोगों का मुंह बंद कराने के लिए सरकार ने बड़ी बड़ी घोषणाएं तो कर दीं हैं लेकिन समय बीत जाने के बाद कोई हमारी सुनवाई नहीं करेगा, हम सबको अधिकारियों के यहां धक्के खाने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि अभी अधिकारियों पर संकट है तो वो किसी तरह से अपना संकट टालने के लिए लुभावनी बातें कर रहे हैं बाद में ये अपने वादे से मुकर जायेंगे तो हम इनका क्या कर लेंगे। किसी का ट्रांसफर हो जायेगा तो कोई यह कह देगा कि हमने मकान और नौकरी देने की बात नहीं की थी। उस समय हम लोग क्या कर लेंगे।