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मिशन शक्ति के तहत एक दिन के थाना प्रभारी बनी छात्राएं

थाना प्रभारी बनकर छात्राओं ने पुलिस विभाग का कामकाज देखकर ली प्रेरणा

सूर्या बुलेटिन

गाजियाबाद। पुलिस का काम मुश्किल है। न ड्यूटी के घंटे, न जरूरत के संसाधन। फिर भी पुलिसकर्मी दिन रात लगे रहते हैं। यह कहना है गुरुवार को थाना प्रभारी बनकर कामकाज देखने वाली छात्राओं का, जिन्होंने जनसुनवाई तो की ही, पुलिसकर्मियों की सुविधाओं के लिए अधिकारियों को पत्र भी लिखा। साथ ही कहा कि उन्हें इस अनुभव से आईपीएस बनने की प्रेरणा भी मिली है। छात्राओं के एसएचओ बनने पर थानों में अलग माहौल देखने को मिला।

–पिंक बूथ का दौरा कर की चेकिंग
साहिबाबाद एसएचओ की कार ने गुरुवार सुबह 10 बजे थाने में प्रवेश किया। कार से एक 10वीं कक्षा की छात्रा स्कूल ड्रेस में एसएचओ का बैच लगाकर उतरी। वहां मौजूद सभी पुलिसकर्मियों ने छात्रा को सैल्यूट किया। यह छात्रा थीं सपना तोमर, जो मिशन शक्ति के तहत सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक के लिए साहिबाबाद थाने की प्रभारी एसएचओ थीं। सपना चौहान ने पूरे थाने का भ्रमण किया और फिर थाना प्रभारी की कुर्सी पर बैठकर फरियादियों की शिकायतें सुनना आरंभ किया। पहली ही शिकायत उनके पास 9वीं कक्षा का एक छात्र लेकर आया। प्रभारी एसएचओ सपना चौहान ने रिपोर्ट दर्ज करके आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की। इसके बाद उन्होंने पिंक बूथ का दौरा किया और एंटी रोमियो स्क्वॉयड के साथ मिलकर वाहनों की चेकिंग भी की।

–आईपीएस बनना चाहती हैं विदुषी
इंदिरापुरम थाने की प्रभारी एसएचओ विदुषी को बनाया गया। विदुषी वसुंधरा स्थित सेठ आनंदराम जैपुरिया स्कूल में कक्षा 11 की छात्रा हैं। उन्होंने थाने पहुंचने वाले फरियादियों की शिकायतें सुनीं और तत्काल कार्रवाई की संस्तुति की। इसके साथ ही उन्होंने पुलिस के साथ मिलकर बुध चौक पर वाहनों की चेकिंग भी की। इस दौरान बिना हेलमेट बाइक चलाने वाले एक युवक का चालान भी काटा। विदुषी ने कहा कि पुलिस का कार्य काफी कठिन है और ड्यूटी का टाइम भी निर्धारित नहीं है। वह आईपीएस बनना चाहती हैं।
–पुलिस का काम मुश्किल भरा हैः पीहू
बाल भारती पब्लिक स्कूल में कक्षा 10 की छात्रा पीहू अग्रवाल को लिंक रोड थाने का प्रभारी एसएचओ बनाया गया था। उन्होंने कहा कि एक दिन का एसएचओ बनकर उन्हें गर्व हो रहा है। पुलिस की जॉब बहुत कठिन है। समस्याओं को समझना और फिर उनका निदान करना पुलिस के लिए काफी मुश्किल होता है। सभी को चाहत होती है कि उनके मामले में तुरंत कार्रवाई हो, लेकिन कार्रवाई के लिए पुलिस को बहुत से साक्ष्य जुटाने पड़ते हैं, जिसमें समय लगता है। उन्होंने पिंक बूथ का दौरा किया और वाहनों की चेकिंग भी की।
–ये भी बनीं प्रभारी एसएचओ
टीला मोड़ थाने पर 12वीं की छात्रा निशा ने चार घंटे तक कमान संभाली। निशा लोक सेवक बनना चाहती हैं। निशा ने पुलिस कर्मियों की ड्यूटी टाइमिंग और आवास की समस्या को लेकर डीसीपी को पत्र भी लिखा। पत्र में पुलिसकर्मियों की ड्यूटी शिफ्टवार करने की संस्तुति करने के साथ उनके आवास की समस्या के समाधन के लिए प्रयास करने की संस्तुति भी की। शालीमार गार्डन थाने पर 12वीं की छात्रा अनुष्का प्रभारी एसएचओ रहीं। अनुष्का सिविल सर्विसेज में जाना चाहती हैं। सीए की छात्रा कृतिका शर्मा ने खोड़ा थाना प्रभारी एसएचओ के तौर पर चार घंटे कामकाज देखा। 11वीं की छात्रा त्रिशा को कौशांबी थाने की प्रभारी एसएचओ की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। त्रिशा का सपना आईपीएस बनकर उच्च पद पर पहुंचना है।
–सभी छात्राओं को भेंट किए गए प्रतीक चिह्न
थाने के कामकाज को समझाने और वाहनों की चेकिंग के बाद सभी छात्राएं डीसीपी ट्रांस हिंडन के कार्यालय पहुंची। जहां उन्होंने अपने अनुभव डीसीपी ट्रांस हिंडन के साथ साझा किए। छात्राओं का कहना था कि फिल्म में पुलिस का जो चरित्र दिखाया जाता है वास्तव में वह उसके एकदम विपरीत है। डीसीपी ट्रांस हिंडन निमिष पाटिल ने सभी छात्राओं को प्रतीक चिह्न भेंट किए। डीसीपी ने कहा कि छात्राओं ने पुलिस की कार्यशैली को समझा और सुझाव भी दिए। इन पर गौर किया जाएगा।

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