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छपरौला में शुची पेपर मिल का प्रदूषण, 3 लाख लोग प्रभावित, बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर असर, प्रशासन की मिलीभगत का आरोप

बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर पड़ रहा प्रतिकूल असर

लोगों ने प्रशासन पर लगाया मिल प्रबंधन से मिलीभगत का आरोप 

सूर्या बुलेटिन

नोएडा। गौतमबुद्ध नगर के छपरौला में स्थित शुची पेपर मिल द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण से लगभग 3 लाख लोग प्रभावित हो रहे हैं। मिल से निकलने वाली राख और काले अवशेष न केवल हवा को प्रदूषित कर रहे हैं, बल्कि यह आसपास के घरों और क्षेत्र को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं। कई बार शिकायत करने के बाद भी प्रशासन और प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। बल्कि राजनेता भी प्रदूषण फैलाने वाली पेपर मिल की ही पैरवी कर रहे हैं, जिससे यह समस्या और ज्यादा गंभीर होती जा रही है। जिससे लोगों का जीवन संकट में पड़ रहा है।  

स्थानीय निवासियों का कहना है कि मिल की चिमनी से निकलने वाली राख उनके घरों की छतों, दीवारों और अन्य स्थानों पर जम रही है, जिससे घरों का रंग काला हो गया है। इस राख में मौजूद रासायनिक तत्वों से स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं, खासकर बच्चों और बुजुर्गों में सांस की बीमारियां, एलर्जी और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। बच्चे और बुजुर्ग इस प्रदूषण से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है और वे जल्दी बीमार पड़ सकते हैं।

स्थानीय लोगों ने इस प्रदूषण के खिलाफ कई बार शिकायतें की हैं।केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेजी गई शिकायतों के बावजूद अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि प्रशासन और संबंधित विभागों ने उनके मुद्दों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया, जिससे समस्या और बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब भी उन्होंने प्रदूषण के खिलाफ शिकायतें दर्ज की हैं, तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों और सरकार के प्रतिनिधियों ने हमेशा मिल प्रबंधन के साथ किसी न किसी रूप में मिलीभगत की है। ये अधिकारी और सरकारी प्रतिनिधि कथित तौर पर भ्रष्ट और स्वार्थी माने जाते हैं, जो मिल के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय उसकी मदद करते रहे हैं।

इस प्रकार के भ्रष्टाचार और मिलीभगत ने लोगों का विश्वास पूरी तरह से खो दिया है, और अब वे न्याय के लिए सख्त कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। इससे पहले, जब कुछ महिलाओं ने मिल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की कोशिश की थी, तो मिल के सुरक्षा गार्डों ने उनका बुरी तरह से पिटाई की थी। इस घटना में एक स्थानीय महिला की टांग बुरी तरह से चोटिल हो गई थी। यह घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी और स्थानीय लोग अब भी इस हादसे को याद करते हैं। सुरक्षा गार्डों द्वारा महिला विरोधियों के साथ की गई हिंसा के बाद, स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई, और इससे मिल के खिलाफ स्थानीय लोगों का गुस्सा और बढ़ गया। शुची पेपर मिल के खिलाफ प्रदूषण फैलाने के आरोप के बाद, पर्यावरण संरक्षण संगठनों ने राज्य सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की है। मिल प्रशासन ने हालांकि इस मामले में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन यह स्पष्ट है कि इस प्रदूषण के कारण लगभग 3 लाख लोगों का जीवन कठिन हो गया है। 

ग्रामीणों ने किया पंचायत आयोजन

ग्रामवासियों ने रविवार को इस विषय में एक पंचायत का आयोजन भी किया और एक व्यापक आंदोलन छेड़ने की रणनीति तैयार की। पंचायत में यह निर्णय लिया गया कि अब प्रशासन की घेराबंदी की जाएगी और मिल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के लिए स्थानीय लोग सड़कों पर उतरने की योजना बना रहे हैं। उनके अनुसार, यदि सरकार और प्रशासन जल्द कदम नहीं उठाते हैं, तो वे न्याय के लिए उच्च न्यायालय का रुख करने पर मजबूर हो सकते हैं। इस प्रदूषण से निपटने के लिए सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि पर्यावरण और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा की जा सके।

इस आंदोलन को विभिन्न किसान संगठनों ने भी समर्थन दिया है और ग्रामवासियों का साथ देने का आश्वासन भी दिया है। किसान संगठनों ने कहा है कि यह प्रदूषण न केवल स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन रहा है, बल्कि कृषि भूमि और पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचा रहा है। उनका कहना है कि यदि प्रदूषण को जल्द नियंत्रित नहीं किया गया, तो इसका प्रभाव खेती और किसानों की आजीविका पर भी पड़ेगा।

किसान संगठनों का समर्थन

इस आंदोलन को विभिन्न किसान संगठनों ने भी समर्थन दिया है और ग्रामवासियों का साथ देने का आश्वासन भी दिया है। किसान संगठनों ने कहा है कि यह प्रदूषण न केवल स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन रहा है, बल्कि कृषि भूमि और पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचा रहा है। उनका कहना है कि यदि प्रदूषण को जल्द नियंत्रित नहीं किया गया, तो इसका प्रभाव खेती और किसानों की आजीविका पर भी पड़ेगा।

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