चितपावन ब्राह्मणों का दुर्भाग्य देश और धर्म के लिए बलिदान देने के लिए

सूर्या बुलेटिन(भागलपुर ,बिहार)। गांधीजी शांति के सबसे बड़े प्रचारक थे। वो दुश्मन को भी क्षमा की सीख देते रहे, लेकिन क्या कारण था कि गांधी के चेलों ने खून का बदला खून से लिया?
1948 में आज यानी 30 जनवरी की रात से ही कांग्रेस ने बापू के हत्यारे नाथूराम गोडसे की जाति के सफाये का अभियान शुरू किया था।
– हत्या गोडसे ने की थी, लेकिन उसका बदला महाराष्ट्र के करीब 5000 निर्दोष ब्राह्मणों से लिया गया।
– इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल थे।
– बंबई, पुणे, सातारा, कोल्हापुर शहरों में 20 हजार के करीब दुकानें और मकान जलाए गए।
– यह पूरा हत्याकांड महाराष्ट्र कांग्रेस के नेताओं की देखरेख में किया गया।
– गांधीजी के चेलों ने वीर सावरकर के छोटे भाई नारायण को ईंटों से पीट–पीटकर मार डाला। इसे ही आजकल lynching कहा जाता है।
– राजीव गांधी ने 84 में सिखों के साथ जो किया वो वैसा ही नेहरू जी 48 में हिंदुओं के साथ कर चुके थे।
– उन दिनों ज्यादातर अखबारों के मालिक कांग्रेसी हुआ करते थे, किसी ने इस नरसंहार पर एक शब्द नहीं छापा।
– सिर्फ न्यूयॉर्क टाइम्स और कुछ विदेशी अखबारों में छपा था कि गांधी की हत्या का बदला लेने के लिए बड़ी संख्या में हत्याएं हुई हैं।
– यह शोध का विषय है कि ब्राह्मणों का इतना बड़ा नरसंहार करवाने वाली कांग्रेस पार्टी कालांतर में ब्राह्मणों की पार्टी कहलाई और इसका अध्यक्ष जनेऊधारी बन बैठा।