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इस्लामिक जिहाद से मानवता की रक्षा के लिये अब सामूहिक प्रयास अनिवार्य-यति नरसिंहानंद सरस्वती जी

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ब्यूरो रिपोर्ट- आकाश निर्वाण यादव

सूर्या बुलेटिन (गाज़ियाबाद)

 

इस्लामिक जिहाद की विभीषिका को विश्व को समझाने के लिये इसी वर्ष विश्व धर्म संसद का आयोजन करेगा शिवशक्ति धाम डासना

आज शिवशक्ति धाम डासना में इस्लामिक जिहाद को लेकर आयोजित प्रथम दो दिवसीय राष्ट्रीय सर्वधर्म अधिवेशन का समापन हुआ।जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज की अध्यक्षता में हुए इस आयोजन में हिन्दू, ईसाई,यहूदी,बहाई,जैन, सिक्ख और बौद्ध धर्मगुरुओं व बुद्धिजीवियों ने भाग लिया।अधिवेशन में बहुत बड़ी संख्या में पूर्व सैन्य अधिकरियों ने भी भाग लिया।

धर्म संसद को सम्बोधित करते हुए यति नरसिंहानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि अब बढ़ता हुआ मुस्लिम जनसँख्या अनुपात ही भारतवर्ष की सबसे बड़ी समस्या बन चुका है।अब यह तय हो चुका है कि 2029 में भारत का प्रधानमंत्री मुस्लिम होगा और उसके बाद भारत भी अफगानिस्तान, पाकिस्तान, सीरिया,इराक और लेबनान की तरह सड़ी हुई लाशों और टूटे भवनों का देश बनकर रह जायेगा।

इस समस्या को सुलझाने में भारत का राजनैतिक तंत्र बिल्कुल ही विफल हो चुका है।मुस्लिम जनसँख्या में अप्रत्याशित वृद्धि का ही परिणाम जगह जगह हो रही हिन्दुओ की हत्याएं हैं।इन हत्याओं पर हिन्दू समाज के नेताओ,धर्मगुरुओं और बुद्धिजीवियों का मौन ये बताने के लिये पर्याप्त है कि हिन्दू समाज के अग्रणीय लोग एक बार फिर इस्लामिक जिहाद के सामने घुटने टेक चुके हैं।अब सोशल मीडिया पर कुछ मुट्ठी भर नौजवानों को छोड़ कर कोई भी आवाज हिन्दुओ के पक्ष में नहीं है।हिन्दुओ के इस दयनीय समर्पण से यह तय हो चुका है कि अब अगले 25 वर्षों में लगभग 50 प्रतिशत हिन्दू धर्मपरिवर्तन करके मुस्लिम बन जायेंगे और 40 प्रतिशत हिन्दू कत्ल कर दिए जाएंगे।बाकी बचे हुए 10 प्रतिशत हिन्दू अपनी जान बचा कर भागने में सफल हो जायेगे जो धीरे धीरे सनातन से कट कर नष्ट हो जाएंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि इस्लामिक भारत मे न केवल हिन्दू बल्कि हर गैर मुस्लिम अर्थात ईसाई,जैन,बौद्ध, सिक्ख,यहूदी,पारसी और बहाई को या तो धर्मपरिवर्तन करना पड़ेगा या कत्ल होना पड़ेगा।इस्लामिक भारत पूरी दुनिया के लिये सबसे बड़ा खतरा होगा जहाँ से जिहादी पूरी दुनिया को तहस नहस कर देंगे।

उन्होंने सभी उपस्थित धर्मगुरुओं से सम्पूर्ण विश्व को बचाने के लिये संयुक्त अभियान चलाने का आह्वान किया और उन्हें यह भी बताया कि इस विषय को लेकर शिवशक्ति धाम डासना विश्व धर्म संसद का आयोजन करेगा जिसमे दुनिया के सभी शीर्षस्थ धर्मगुरुओं को आमंत्रित किया जाएगा।उन्होंने इस कार्य के लिए सभी उपस्थित धर्मगुरुओं से सहायता करने का अनुरोध किया।

अधिवेशन की अध्यक्षता करते हुए जगदगुरू शंकरचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती जी ने कहा कि ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि धीरे धीरे सम्पूर्ण विश्व के धर्मगुरु इस्लामिक जिहाद के समक्ष दयनीय समर्पण करते जा रहे हैं।अगर कुछ दिन और यही स्थिति रही तो शायद सम्पूर्ण विश्व के दो तिहाई हिस्से पर इस्लाम के जिहादियों का कब्ज हो जाएगा।उसके बाद दुनिया का क्या होगा यह सहज ही समझा जा सकता है।

उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय से शिवशक्ति धाम डासना की योजनाओं में भाग लेकर उन्हें सफल बनाने का आह्वान किया।

अधिवेशन में भारत के सर्वोच्च यहूदी धर्मगुरु ईज़किल इसाक मालेकर,जैन मुनि आचार्य लोकेश, आध्यात्मिक गुरु पवन सिन्हा जी,अंतरराष्ट्रीय ध्यान गुरु दीपांकर जी,ईसाई धर्मगुरु फादर पितर टीटो,बहाई समुदाय के ए के मर्चेंट, सरदार ओंकार सिंह नरूला,सरदार रविरंजन सिंह,सरदार सतविंदर सिंह”स्वामी शून्य” तथा अन्य गणमान्य धर्मगुरुओं ने भी अपने विचार रखे और विश्व धर्म संसद को समर्थन और सहयोग देने का आश्वासन दिया।

अधिवेशन में भाग लेने वाले पूर्व सैन्य अधिकरियों में कर्नल टी पी एस त्यागी(वीर चक्र),कर्नल अजयवीर सिंह,कर्नल एल के शाह,कर्नल ओमवीर त्यागी,कर्नल सत्यपाल सिंह,नेवी कमांडर भूषण धवन,मेजर विवेक सिंह,कैप्टन राजीव शर्मा,कारगिल योद्धा बाबा परमेंद्र आर्य तथा अन्य सैन्य अधिकारी भी थे।

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