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जमातीयों पर दया और विद्यार्थियों पर विदेश से वापस लाने हेतु दो लाख का दंड

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संवाददाता:-आकाश यादव

जमातीयों को बिरयानी एवं पांच सितारा सुविधाएं और विद्यार्थियों पर विदेश से वापस लाने हेतु दो लाख का दंड

     सुर्या बुलेटिन(दिल्ली) विदेशों में फंसे भारतीयों को स्वदेश वापस लाने हेतु व्यापक स्तर पर सरकार द्वारा वंदे मातरम नामक अभियान चलाया जा रहा है। ज्ञात हो कि विदेश में फंसे इन भारतीयों में एक बड़ा हिस्सा उन विद्यार्थियों का भी है जोकि भारत से विदेश उच्च शिक्षा प्राप्त करने के उद्देश्य से गए थे। इन विद्यार्थियों में अधिकाधिक वह विद्यार्थी हैं जो या तो छात्रवृत्ति पाकर विदेश पढ़ने गए अथवा उनके मध्यमवर्गीय माता पिता ने अपने परिश्रम से अर्जित जो भी जमा पूंजी थी वह अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य हेतु उन्हें विदेश में शिक्षा ग्रहण करने हेतु भेजने में लगा दो। इन्हीं में से रूस में फंसे कुछ विद्यार्थियों ने हमारे विशेष संवाददाता आकाश यादव से संपर्क साधा तथा वंदे मातरम अभियान के द्वारा भारत सरकार तथा रूस में स्थित भारतीय दूतावास ने जो अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर वंदे मातरम के अंतर्गत रूस में रह रहे भारतीयों के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं उसमें स्पष्ट रूप से कहा गया की घर की उड़ान भरने से पूर्व सभी यात्रियों के पास covid-19 जांच पत्र होना अनिवार्य है तथा इस जांच के व्यय को यात्री स्वयं वहन करेंगे। केवल यही नहीं यात्रियों द्वारा उड़ान का खर्च भी वहन किया जाएगा साथ ही साथ भारत पहुंचने पर उन्हें जिस क्वॉरेंटाइन सेंटर पर रखा जाएगा उसका 1 दिन का तीन से चार हजार का शुल्क भी 14 दिनों के लिए उन्हें स्वयं वहन करना होगा। विदित हो कि इनमें से अधिकतम लोगों ने पहले से ही फ्लाइट टिकट्स बुक कराए हुए थे जिनको कैंसिल कर दिया गया और कोई पैसा भी वापस नहीं किया गया। सामान्य रूप से रूस की एक उड़ान का खर्चा प्रति व्यक्ति लगभग ₹50000 होता है। यदि यह सब मिलाकर कुल खर्च होने वाली राशि लगभग ₹200000 तक होती है। अब यहां एक प्रश्न जो किसी भी भारतीय के मन में उठना स्वाभाविक है वह यह कि एक ओर तो सरकार तबलीगी जमात के उन जमातियों को देशभर में पांच सितारा होटल में क्वॉरेंटाइन कर रही है साथ ही खाने में एक से बढ़कर एक व्यंजन परोस रही है बिरयानी परोस रही है। ध्यान रहे कि यह वही जमाती हैं जिन्होंने संपूर्ण देश में कोरोना कैरियर का काम किया और सारे देश को खतरे में डाला उनके ऊपर विशेष कृपा दृष्टि रखते हुए सारी प्रदेश सरकारें तथा स्वयं भारत सरकार पीएम केयर तथा सीएम रिलीफ फंड में आए करोड़ों अरबों के दान के पैसों को खुले दिल से उड़ाने मैं कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। वहीं दूसरी ओर देश के वे मेधावी विद्यार्थी जो मध्यम अथवा निम्न वर्ग से संबंध रखते हैं और अपनी प्रतिभा के बल पर विदेश में स्थान पाकर भारत का गौरव बढ़ा रहे हैं, उन्हें इस कठिन परिस्थिति में भी दोहरी आर्थिक मार सहनी पढ़ रही है।  

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