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ज्ञानवापी सर्वे: मस्जिद के तीनों गुंबद के नीचे शिखरनुमा आकृति! तहखाने में मिली मिट्टी से सनी भगवान की फोटो; यहां पढ़ें रिपोर्ट की बड़ी बातें

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सूर्या बुलेटिन : ज्ञानवापी परिसर स्थित शृंगार गौरी एवं अन्य विग्रहों के सर्वे के लिए नियुक्त स्पेशल कोर्ट कमिश्नर ने गुरुवार को सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में अपनी रिपोर्ट पेश कर दी। यह सर्वे 12 मई से 16 मई तक हुआ था। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार सिविल जज कोर्ट ने ज्ञानवापी प्रकरण की सुनवाई 23 मई तक टाल दी है, इसलिए सर्वे रिपोर्ट पर भी कोई बहस नहीं हुई।

जैसा कि सूत्रों ने बताया, सर्वे रिपोर्ट में ज्ञानवापी मस्जिद के तीनों गुंबदों के नीचे शंकुकार शिखरनुमा आकृति मिली है। वहीं, रिपोर्ट में भी मस्जिद के वजूखाना के लिए कुंड में शिवलिंग मिलने का संकेत किया गया है। इसका कोर्ट कमिश्नर ने पत्थर की 2-5 फीट ऊंची और चार फीट व्यास वाली गोलाकार आकृति के रूप में उल्लेख किया है। इसकी ज्ञानवापी में पहले से मौजूद नंदी से दूरी 83 फीट तीन इंच मिली है।




ज्ञानवापी प्रकरण में राखी सिंह एवं अन्य महिला पक्षकारों ने सिविल जज की अदालत में शृंगार गौरी एवं अन्य विग्रहों की स्थिति स्पष्ट करने और उन विग्रहों के दर्शन-पूजन के अधिकार की मांग के साथ एक याचिका दायर की है। वादियों ने आग्रह किया था कि वस्तुस्थिति जानने के लिए परिसर का सर्वे आवश्यक है। उस आग्रह पर पहले छह व सात मई के सर्वे की रिपोर्ट पूर्व कोर्ट कमिश्नर अजय कुमार मिश्र ने पेश की है जबकि 14 से 16 मई तक स्पेशल कोर्ट कमिश्नर विशाल सिंह की देखरेख में सर्वे कार्यवाही हुई।

सूत्रों के अनुसार स्पेशल कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट में कहा गया है कि 14 मई को सर्वे के दौरान ज्ञानवापी मस्जिद के उत्तरी, मध्य और दक्षिणी गुंबदों के नीचे शंकुकार शिखरनुमा आकृति दिखी है। उन पर स्वास्तिक, त्रिशूल और फूल की कई आकृतियां भी दिखी हैं। पहले गुंबद में साढ़े आठ फीट नीचे मिली शिखरनुमा आकृति की ऊंचाई ढाई फीट और व्यास लगभग 18 फीट है। यही माप मध्य या केंद्रीय गुंबद के नीचे मिले शिखर की भी है।

दक्षिणी गुंबद के नीचे मिले शिखर का व्यास लगभग 21 फीट है। तीनों ही गुंबदों में शिखर की ओर तीन फीट चौड़ा रास्ता गया है। इन तीनों आकृतियों को मौके पर मौजूद वादी पक्ष के अधिवक्ता ने प्राचीन मंदिर का शिखर बताया जिसे प्रतिवादी अधिवक्ता ने गलत करार दिया। बताया गया कि सर्वे रिपोर्ट में उल्लेख है कि ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाना के पास स्थित कुंड में पत्थर की काली गोलाकार आकृति मिली है जिसकी ऊंचाई लगभग 2.5 फीट और व्यास 4 फीट है।

आकृति के ऊपर कटी हुई गोलाकार डिजाइन का अलग सफेद पत्थर दिखा है। उसके बीचोबीच आधे इंच के बराबर एक गोल छेद भी है। (इस आकृति को ही शिवलिंग मानते हुए वादी पक्ष के अधिवक्ता हरिशंकर जैन के आग्रह पर कोर्ट ने वजूखाना को सील करने का आदेश दिया है। प्रतिवादी अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी और उसके अधिवक्ता इस आकृति को फव्वारा बता रहे हैं)।

मुंशी नहीं बता सके, फव्वारा कब से बंद है

सूत्रों ने बताया कि स्पेशल कोर्ट कमिश्नर को मस्जिद कमेटी के मुंशी स्पष्ट नहीं बता सके कि जिसे वह फव्वारा कह रहे हैं, वह कब से बंद पड़ा है। कभी कहा कि 20 वर्ष, कभी 12 वर्ष। इस आकृति में एक छेद के अलावा न कोई अन्य छेद मिला है और न ही फव्वारा के लिए पाइप घुसने का कोई स्थान। तीन दिनों के सर्वे के दौरान मस्जिद के तहखाने में पुराने पत्थरों से बने तीन खंभे भी दिखे हैं जिन पर सनातन संस्कृति के प्रतीक चिह्न उकेरे मिले हैं।

इसी तरह के चिह्न मस्जिद की पश्चिमी और पूर्वी दीवारों पर भी दिखे हैं। तहखाने में ही भगवान की दो फीट लंबी मिट्टी से सनी हुई एक फोटो भी पाई गई। इन सभी की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई गई है। बताया जाता है कि गुंबदों के सर्वे के दौरान वादी पक्ष के अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने प्राचीन मंदिर का नक्शा भी दिया। उन्होंने स्पेशल कोर्ट कमिश्नर से कहा कि मौजूदा गुंबद और उनके नीचे मिली शिखरनुमा आकृति प्राचीन मंदिर में विद्यमान चार मंडपों जैसे हैं। हालांकि इसका प्रतिवादी पक्ष ने विरोध किया।

कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट साक्ष्य नहीं

अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के अधिवक्ता अभयनाथ यादव ने कहा, ‘कमीशन की कार्यवाही रिपोर्ट की प्रति अभी नहीं मिली है। वैसे भी यह रिपोर्ट अंतिम नहीं होती है। जो भी हो रिपोर्ट पर कानूनी रूप से आपत्ति दाखिल की जाएगी। सर्वे के आधार पर किसी चीज को शिवलिंग बताने का अधिकार नहीं है। केवल तथ्य का ब्योरा देना क्षेत्राधिकार में आता है। ऐसी रिपोर्ट अपने आप में साक्ष्य भी नहीं है। किसी को भ्रमित नहीं होना चाहिए।’

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